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भारत में कृषि क्षेत्र को आधुनिक और लाभकारी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘प्रगति’ (PRAGATI) राष्ट्रीय पहल की शुरुआत की है। इस परियोजना का उद्देश्य देशभर में 20,000 कृषि-उद्यमी (Agri-Entrepreneurs) तैयार करना और 20 लाख छोटे एवं सीमांत किसानों को आधुनिक तकनीक, बाजार, वित्तीय सेवाओं और वैज्ञानिक खेती से जोड़कर उनकी आय बढ़ाना है।
यह पहल ग्रामीण युवाओं, महिला किसानों और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देकर भारत के कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने का लक्ष्य रखती है।
क्या है प्रगति’ (PRAGATI) प्रोजेक्ट?
‘प्रगति‘ एक राष्ट्रीय कृषि-उद्यमिता कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य गांवों में प्रशिक्षित कृषि-उद्यमियों का नेटवर्क तैयार करना है। ये कृषि-उद्यमी किसानों को खेती से जुड़ी आधुनिक सेवाएं, तकनीकी सलाह, मशीनरी, मिट्टी परीक्षण, बाजार से जुड़ाव और वित्तीय सहायता तक पहुंच बनाने में मदद करेंगे।
यह कार्यक्रम विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और कृषि को अधिक लाभदायक बनाने पर केंद्रित है।
किन राज्यों में लागू होगी यह योजना?
प्रगति परियोजना को शुरुआती चरण में निम्नलिखित प्रमुख कृषि राज्यों में लागू किया जाएगा:
- मध्य प्रदेश
- उत्तर प्रदेश
- बिहार
- महाराष्ट्र
- राजस्थान
- पश्चिम बंगाल
- असम
- झारखंड
आगे चलकर इस पहल का विस्तार अन्य राज्यों में भी किया जा सकता है।
किसानों को क्या-क्या मिलेगा लाभ?
प्रगति परियोजना के तहत किसानों को कई महत्वपूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
- आधुनिक खेती की तकनीकी सलाह
- मिट्टी परीक्षण (Soil Testing)
- कृषि मशीनों की सेवाएं
- डिजिटल कृषि सलाह
- वित्तीय संस्थानों से जुड़ाव
- बेहतर बाजार (Market Linkage)
- वैकल्पिक आय के अवसर
- ड्रोन एवं आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी
इन सुविधाओं का उद्देश्य किसानों की लागत कम करना और उत्पादन बढ़ाना है।
केवल खेती नहीं, वैल्यू एडिशन और विविधीकरण पर होगा जोर
कार्यक्रम के शुभारंभ के दौरान श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केवल पारंपरिक खेती से किसानों की आय में अपेक्षित वृद्धि संभव नहीं है। उन्होंने किसानों को कृषि के साथ-साथ निम्न क्षेत्रों में भी आगे बढ़ने की सलाह दी:
- बागवानी
- पशुपालन
- मत्स्य पालन
- मधुमक्खी पालन
- कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग
- वैल्यू एडिशन
इन क्षेत्रों के माध्यम से किसान अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं और जोखिम भी कम कर सकते हैं।
महिला शक्ति बनेगी बदलाव की ताकत
प्रगति परियोजना में महिलाओं की भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है। बड़ी संख्या में कृषि सखी (Krishi Sakhi) और महिला कृषि-उद्यमियों को प्रशिक्षण देकर गांव-गांव तक कृषि सेवाएं पहुंचाई जाएंगी।
सरकार का मानना है कि एक प्रशिक्षित कृषि-उद्यमी पूरे गांव की कृषि व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
आधुनिक तकनीक और मशीनीकरण पर विशेष फोकस
प्रगति परियोजना के माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं:
- ड्रोन आधारित कृषि सेवाएं
- डिजिटल सलाह
- वैज्ञानिक खेती
- मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन
- कृषि मशीनीकरण
- पुनर्योजी (Regenerative) कृषि पद्धतियां
इन तकनीकों के उपयोग से उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ खेती की लागत कम करने में भी सहायता मिलेगी।
किसानों की आय बढ़ाने का बड़ा लक्ष्य
सरकार ने इस परियोजना के तहत कई महत्वपूर्ण लक्ष्य निर्धारित किए हैं:
- 20,000 नए कृषि-उद्यमी तैयार करना।
- 20 लाख छोटे एवं सीमांत किसानों को लाभ पहुंचाना।
- किसानों की आय में कम से कम 30% तक वृद्धि का लक्ष्य।
- धान, मक्का और आलू जैसी प्रमुख फसलों की उत्पादकता में 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि।
- कम से कम 20% किसानों को पुनर्योजी कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना।
- किसानों की वित्तीय साक्षरता और औपचारिक बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच बढ़ाना।
कौन-कौन से संस्थान जुड़े हैं इस परियोजना में?
प्रगति परियोजना को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों का सहयोग प्राप्त है। इनमें प्रमुख हैं:
- PepsiCo Foundation
- SBI Foundation
- Gates Foundation
- IDH
- Heifer International
- Environmental Defense Fund (EDF)
- Global Agri Entrepreneurship Academy
- SAFIA
- Agri Entrepreneur Growth Foundation (AEGF)
- Transform Rural India Foundation (TRIF)
ये संस्थाएं प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, डिजिटल सेवाएं, वित्तीय समावेशन और बाजार संपर्क उपलब्ध कराने में सहयोग करेंगी।
विकसित भारत के लिए विकसित कृषि जरूरी
कार्यक्रम के दौरान श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि “विकसित भारत का सपना विकसित कृषि और समृद्ध गांवों के बिना संभव नहीं है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं बल्कि किसानों की वास्तविक आय बढ़ाना, कृषि को लाभकारी बनाना और गांवों को आत्मनिर्भर बनाना है।
निष्कर्ष
‘प्रगति’ (PRAGATI) परियोजना भारत के कृषि क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है। यदि यह योजना निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो इससे लाखों छोटे किसानों, ग्रामीण युवाओं और महिला कृषि-उद्यमियों को नए अवसर मिलेंगे। आधुनिक तकनीक, कृषि मशीनीकरण, वैल्यू एडिशन और बाजार से जुड़ाव के माध्यम से यह पहल किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ भारतीय कृषि को अधिक टिकाऊ, आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
स्रोत (Source): भारत सरकार, प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति, दिनांक 07 जुलाई 2026।
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